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Youth Icon स्वामी विवेकानंद को किसने दिया था ये नाम, कब मनाया गया पहला राष्ट्रीय युवा दिवस; आइए जानें

पानीपत. जब भी प्रेरणा की बात आती है, अनायास ही स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) का नाम जुबान पर आ जाता है। यह वह शख्सियत हैं, जिनके जन्मदिन को पूरा भारतवर्ष युवा दिवस के रूप में मनाता है। आज 4 जुलाई को उनकी सांसारिक यात्रा का विश्राम दिवस है। इस खास मौके पर shabdachakra.com आपको कुछ ऐसे पहलुओं से रू-ब-रू करा रहा है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे। आइए जानते हैं कौन था वह शख्स, जिसने नरेंद्र नाथ को स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) बना दिया और कब स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) के जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाने लगा…

स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जाने-माने वकील विश्वनाथ दत्त के घर हुआ था, जो काफी संपन्न परिवार था। विवेकानंद (Swami Vivekanand) का असली नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। बचपन में ही पिता का देहांत हो जाने के बाद माता भुवनेश्वरी देवी ने उन्हें संभाला। उस वक्त घर की माली हालत कमजोर हो गई तो परिवार के दूसरे लोगों को भूखा नहीं देखने की मंशा से स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) ने दोपहर का खाना छोड़ दिया।

स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) शुरू से ही योगी स्वभाव के धनी थे। भगवान से जुड़े सवालों में कोई उनकी मदद नहीं कर पाता था। 1880 में वह ब्रह्म समाज के संस्थापक देवेंद्रनाथ टैगोर (रविंद्रनाथ टैगोर के पिता) से मिले और जब उन्होंने टैगोर से पूछा कि क्या उन्होंने भगवान को देखा है तो देवेंद्रनाथ टैगोर ने कहा था- मेरे बच्चे, आपके पास योगी की आंखें हैं। इसके बाद 1881 में रामकृष्ण परमहंस से मिले तो भी उन्होंने वही प्रश्न पूछा। अब जवाब मिला-हां मैंने देखा है, मैं भगवान को उतना ही साफ देख पा रहा हूं जितना कि तुम्हें देख सकता हूं। बस फर्क इतना ही है कि मैं उन्हें तुमसे ज्यादा गहराई से महसूस कर सकता हूं। इस जवाब ने विवेकानंद (Swami Vivekanand) के जीवन पर गहरी छाप छोड़ी और वह परमहंस के शिष्य बन गए।

बड़ी हैरानी की बात है कि स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) को युवावस्था में ही दमा और शुगर जैसी बीमारियां हो गई थी। स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) ने यह भी भविष्यवाणी की थी कि यह बीमारी उन्हें 40 वर्ष तक भी नहीं जीने देंगी। हुआ भी वैसा ही और 4 जुलाई 1902 को महज 39 साल की उम्र में वह अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर गए। 1985 में भारत में पहली बार उनके जन्मदिन 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। अभी तक बहुत से लोग यही मानते हैं कि नरेंद्रनाथ को उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस ने विवेकानंद (Swami Vivekanand) नाम दिया था, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। प्रसिद्ध फ्रांसिसी लेखक रोमां रोलां ने अपनी किताब ‘द लाइफ ऑफ विवेकानंद एंड द यूनिवर्सल गोस्पल’ के मुताबिक स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) को इस नाम से राजपूताना के खेतड़ी नरेश ने पुकारा था। दरअसल, 1891 में स्वामी जी को अमेरिका के शिकागो में आयोजित धर्मसंसद में जाना था और इसके लिए उनके पास पैसे नहीं थे। उनकी इस यात्रा का खर्च खेतड़ी नरेश ने ही उठाया था। राजा के कहने पर स्वामी जी ने यह नाम स्वीकारा था।

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